सहजन बना ‘सुपरफूड’: रसोई की साधारण फली अब वैश्विक स्वास्थ्य क्रांति का केंद्र

Sat 14-Feb-2026,11:57 PM IST +05:30

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सहजन बना ‘सुपरफूड’: रसोई की साधारण फली अब वैश्विक स्वास्थ्य क्रांति का केंद्र Moringa Superfood
  • सहजन बना वैश्विक सुपरफूड.

  • पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर.

  • कुपोषण और इम्यूनिटी के लिए उपयोगी.

Maharashtra / Nagpur :

Nagpur / भारत की रसोई में वर्षों से इस्तेमाल होने वाला सहजन, जिसे अंग्रेज़ी में मोरिंगा या ड्रमस्टिक कहा जाता है, आज वैश्विक स्तर पर एक ‘सुपरफूड’ के रूप में उभर रहा है। जो फली कभी सिर्फ सांभर या सब्जी का स्वाद बढ़ाने के लिए जानी जाती थी, वही अब वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नजर में एक प्राकृतिक पोषण का खजाना बन चुकी है। आधुनिक रिसर्च और पारंपरिक ज्ञान के मेल ने सहजन को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। खास बात यह है कि जिस पौधे को भारत के ग्रामीण इलाकों में सामान्य माना जाता था, वही अब दुनिया के विकसित देशों में स्वास्थ्य सप्लीमेंट के रूप में बेचा जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सहजन की पत्तियों, फली और बीजों में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और विटामिन जैसे कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही कारण है कि इसे ‘नेचुरल मल्टीविटामिन’ भी कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने पौधों पर आधारित पोषण को बढ़ावा देने पर जोर दिया है, और मोरिंगा को पोषण की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए उपयोगी विकल्प बताया गया है। सहजन की पत्तियों में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं, जबकि इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है।

भारत में सहजन का उपयोग सदियों से आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में होता आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, खून की कमी दूर करने और शरीर को ताकत देने के लिए उपयोग किया जाता रहा है। आज जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कमजोरी तेजी से बढ़ रही हैं, तब सहजन को एक प्राकृतिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नियमित रूप से सहजन का सेवन शरीर की ऊर्जा बढ़ाने और मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में सहायक हो सकता है।

हालांकि सोशल मीडिया पर सहजन को लेकर कई बढ़ा-चढ़ाकर दावे भी किए जाते हैं, जैसे इसमें संतरे से सैकड़ों गुना अधिक विटामिन होने की बात कही जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन दावों को पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता, लेकिन यह सच है कि सहजन में कई आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर इसके वास्तविक लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

भारत जैसे देश में, जहां कुपोषण अभी भी एक बड़ी चुनौती है, सहजन एक सस्ता और सुलभ विकल्प साबित हो सकता है। भारत के कई राज्यों में इसे आंगनबाड़ी और मिड-डे मील जैसी योजनाओं में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि बच्चों और महिलाओं को आवश्यक पोषण मिल सके। सहजन का पेड़ कम पानी में भी आसानी से उग जाता है, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ विकल्प भी बन जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सहजन को ‘मिरेकल ट्री’ कहने के पीछे कारण इसका बहुआयामी उपयोग है। इसकी पत्तियां, फली, बीज और यहां तक कि जड़ भी विभिन्न उपयोगों में लाई जा सकती है। यह न केवल शरीर को पोषण देता है, बल्कि इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में भी मदद करता है। यही कारण है कि आज सहजन सिर्फ एक पारंपरिक सब्जी नहीं, बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

बदलती जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच सहजन एक बार फिर लोगों की थाली में अपनी जगह बना रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमारे पूर्वजों की वह अमूल्य धरोहर है, जिसे आधुनिक विज्ञान ने भी स्वीकार करना शुरू कर दिया है। ऐसे में अगली बार जब आपकी थाली में सहजन आए, तो इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपने बेहतर स्वास्थ्य के लिए एक प्राकृतिक उपहार के रूप में जरूर अपनाएं।